हिंदू बुल, मुस्लिम चूत और ककोल्ड पति
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हिंदू बुल, मुस्लिम चूत और ककोल्ड पति

नोएडा की उसी सोसाइटी में जहाँ मैं, मोनू – तीस साल का मुस्लिम ऑफिस क्लर्क – अपनी बीवी उजमा के साथ रहता हूँ, पिछले कुछ हफ्तों से कुछ बदला‑बदला सा महसूस हो रहा था। उजमा पहले की तरह पर्दे में रहती थी, लेकिन अब वह जिम के टाइम्स में टाइट लेगिंग्स और कROP टॉप पहनकर बाहर निकलने लगी। उसके स्तनों की उभरी हुई बनावट और टाइट पैंटी की रेखा अक्सर मेरे gaze को रोक देती। मैं चुपचाप देखता रहा, अपने लंड में एक अजीब सी excitations की लहर महसूस करते हुए।

एक शाम, जब मैं ऑफिस से थक कर घर लौटा, तो बालकनी में उजमा खड़ी थी – उसकी साड़ी का pallu गिरा हुआ, ब्रा के straps दिख रहे थे, और वह एक लड़के के साथ हँस रही थी। वह लड़का लंबा, चौड़ाई में भारी, कंधों पर जिम के वजन से बनी हुई मांसपेशियाँ, और एक तेज़ गंध वाला परफ्यूम लगाए हुए था। उसका नाम वीरम था – एक कट्टर हिंदू, जिम का ट्रेनर, जो अक्सर हमारे फ्लैट के पास की पार्किंग में अपनी बाइक खड़ी करता था।

“भाभी जी, आज का leg day कैसा गया?” वीरम ने मुस्कुराते हुए पूछा, उसकी आँखें उजमा की चूचियों पर टिक गईं।

उजमा ने अपने होंठों को भींचते हुए जवाब दिया: “अच्छा… लेकिन अभी भी थोड़ा तनाव है।”

वीरम ने एक कदम आगे बढ़ाया, उसकी उंगली उजमा की कमर पर फिसली। “मैं वो तनाव दूर कर सकता हूँ… अगर आप अनुमति दें।”

उस रात मैं सो नहीं पाया। दीवार के पास खड़े होकर मैंने सुना – उजमा की सिसकारियाँ, वीरम की गहरी साँसें, और फिर ए आवाज़: “तुम्हारी चूत तो जैसे आग है, भाभी… मैं इसे बुझाना चाहता हूँ।”

अगले दिन वीरम ने हमें अपने फ्लैट पर चाय के लिए बुलाया। मैं अनिच्छा से गया, लेकिन उजमा की आँखों में एक चमक देखी – जैसे वह कुछ नया आजमाने को तैयार हो।

वीरम का फ्लैट साफ़-सुथरा था, लेकिन बीच में एक बड़ा सोफा था जिस पर एक काली चमड़े की पट्टी बंधी हुई थी – जैसे किसी बंधन के लिए। उसने हमें सोफे पर बैठने को कहा और खुद एक protein shake बनाते हुए कहा: “आज मैं तुम्हें दोनों को एक नया अनुभव दूँगा।”

उजमा ने झिझकते हुए कहा: “क्या… क्या हम कुछ ऐसा कर सकते हैं जो… जो हमारे सामान्य रूटीन से बाहर हो?”

वीरम ने हँसते हुए जवाब दिया: “बिल्कुल। बस तुम दोनों को मेरे कहने पर करना होगा।”

उसने पहले उजमा को खड़ा किया और उसकी साड़ी का pallu खींचकर गिरा दिया। उजमा की ब्रा के कप से उसके स्तन बाहर निकल आए – गहरे, गुलाबी निप्पल जो हवा में फड़फड़ा रहे थे। वीरम ने एक हाथ उजमा की कमर पर रखा और दूसरे हाथ से उसकी चूत के ऊपर की पैंटी को धीरे-धीरे नीचे खींच दिया। पैंटी गिरते ही उजमा की चिकनी चूत दिखी – उसकी फड़फड़ाती हुई खुजली के साथ एक चमकदार रस टपक रहा था।

“देखो, Monu,” वीरम ने मेरी ओर मुड़कर कहा, “तुम्हारी बीवी की चूत तो जैसे एक आमंत्रण है। मैं इसे भर दूँगा।”

मैं खड़ा रहा, मेरा लंड पैंट में तना हुआ, दिल की धड़कन तेज़। वीरम ने उजमा को सोफे पर पीठ के बल लिटा दिया और अपने कपड़े उतारने शुरू किए। उसकी टी-शर्ट उतरते ही छाती पर बालों का जंगल दिखा, बीच में एक मोटी नस जो उसके लंड की ओर जा रही थी। जींस खोलते ही अंडरवियर फटने को था – लंड का उभार साफ़ दिख रहा था, टोपा लाल-गुलाबी, नसें उभरी हुईं।

वीरम ने अंडरवियर उतारा। लंड बाहर आया – लगभग नौ इंच लंबा, मोटा जैसे हाथ की कलाई, टोपा पर एक चमकती हुई precum की बूंद। नसें धड़क रही थीं, जैसे वो किसी जानवर की तरह फड़फड़ा रहा हो।

“तुम्हारी चूत तैयार है?” वीरम ने उजमा के होंठों पर अपने टोपा को रखते हुए पूछा।

उजमा ने फुसफुसाते हुए जवाब दिया: “हाँ… लो अंदर… पूरा का पूरा लंड डाल दो।”

वीरम ने एक धीमा धक्का मारा। टोपा उजमा की चूत के होंठों को फाड़ते हुए अंदर फिसल गया। उजमा की पीठ arches हो गई, वो एक लंबी, कामुक चीख के साथ झुक गई: “आह्ह्ह… इतना टाइट है!”

मैं सोफे के किनारे पर खड़ा रहा, मेरा लंड पैंट में दर्द कर रहा था। वीरम ने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाई। हर बार जब लंड बाहर आता, तो उजमा की चूत से एक लंबा, चिपचिपा धागा निकलता – वीर्य जैसा रस। जब अंदर जाता, तो उजमा की चूत फूल जाती, फिर सिकुड़ कर लंड को जकड़ लेती।

“तुम्हारी चूत तो जैसे एक वैक्यूम है,” वीरम ने ग़ुर्राते हुए कहा, धक्कों की रफ़्तार बढ़ाते हुए, “हर धक्के पर वो मेरे लंड को खा जाती है।”

उजमा ने अपनी टाँगें वीरम की कमर में लपेट लीं, अपनी गांड ऊपर उठा कर धक्कों का जवाब दे रही थी। हर धक्के के साथ उसकी चूत से एक गहरी “आह…” निकलती, और वो अपने नाख़ून वीरम की पीठ में गड़ा देती।

फिर वीरम ने उजमा को डॉगी स्टाइल में बदल दिया. उसने उजमा की चूत से लंड बाहर निकाला – चूत से एक लंबा धागा टूटा, वीर्य जैसा रस लंड पर लिपटा हुआ था. फिर उसने लंड को चूत के होंठों पर रखकर एक तेज़ धक्का मारा.

उजमा की चूत फड़फड़ाते हुए खुल गई, लंड पूरा अंदर तक घुस गया. वो एक लंबी, दर्दनाक सिसकारी के साथ झुक गई: “आह्ह्ह… मर गई… इतना गहरा…”

वीरम ने तेज़ धक्के लगाने शुरू किए. हर धक्के के साथ:

- उजमा की चूत से एक गीली “पच… पच… पच…” आवाज़ आती

- उसकी चूत की दीवारें लंड को भींचतीं, फिर ढीली पड़तीं

- लंड पर चमकता वीर्य का रस बढ़ता जा रहा था

- उजमा की गांड हर धक्के पर ऊपर उछलती, जैसे वो लंड को और अंदर लेना चाहती हो

“तुम्हारी चूत… ये तो जैसे एक गर्म भट्ठी है,” वीरम ने कहा, उजमा की चूचियों को दबाते हुए, “हर धक्के पर वो मेरे लंड को निगल लेती है.”

उजमा ने फुसफुसाते हुए जवाब दिया: “हाँ… खा जाओ… पूरा का पूरा लंड निगलो.”

वीरम ने एक गहरा, तेज़ धक्का मारा – और झड़ गया. लंड उजमा की चूत के गहराई में pulsate करने लगा. वीर्य की गर्म बूंदें चूत की दीवारों पर टपकने लगीं, फिर भरने लगीं – जैसे एक गर्म नदी उजमा के अंदर बह रही हो.

उजमा ने अपनी चूत को वीरम के लंड के चारों ओर कस लिया, जैसे वो हर बूंद को सोख लेना चाहती हो. उसकी सिसकारी बदलकर एक गहरी, संतोषजनक moan में बदल गई: “आह… भर गया… पूरा का पूरा भर गया…”

वीरम ने लंड बाहर निकाला. चूत से एक लंबा, मोटा धागा टूटा – वीर्य का गुब्बारा फट गया. चूत से सफ़ेद-पीला वीर्य बहने लगा, उजमा की जांघों पर टपकता हुआ. चूत के होंठ थोड़े फुले हुए थे, अंदर से एक गर्म चमक आ रही थी.

अब आया मोड़ जिसकी मैं उम्मीद भी नहीं कर रहा था. वीरम ने उजमा को उठाकर सोफे की पीठ की ओर घुमाया और कहा: “अब तुम्हारी बारी है, cuckold.”

उसने मेरा हाथ पकड़कर मेरी पैंटी की कमर के पास ले गया और मेरी पैंट के बटन खोल दिए. मेरा लंड बाहर आ गया – तना हुआ, नसें फड़फड़ा रही थीं. वीरम ने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और धीरे-धीरे stroking शुरू किया.

“देखो, कैसे ये मुस्लिम पति अपने लंड को हिला रहा है जबकि उसकी बीवी की चूत से मेरे वीर्य की बूंदें टपक रही हैं,” वीरम ने मुस्कुराते हुए कहा, “ये सच्चा ककोल्ड है.”

उजमा ने मेरे सिर को अपनी चूत की ओर खींचते हुए फुसफुसाया: “चाटो, Monu… मेरे स्वामी की बनी हुई चूत को साफ़ करके दिखाओ कि तुम एक सच्चा पति हो.”

मैं झुक गया और अपनी जीभ उजमा की चूत पर रख दी. वीर्य की गर्म, नमकीन स्वाद मेरे जीभ पर फैल गया. मैं अंदर तक गया, उजमा की चूत की दीवारों को चाटते हुए, वीर्य की मोटी परत को बाहर निकालते हुए. हर बार जब मैं वीर्य चाटता, तो उजमा की चूत से एक छोटा सा “आह…” निकलता, और वो अपनी गांड ऊपर उठा कर मेरे मुंह की ओर दबा देती.

वीरम ने मेरी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा: “और अब तुम भी मेरे लंड को चूसो, cuckold. दिखाओ कि तुम कितना अच्छा ले सकते हो.”

उसने मेरे सिर को अपने लंड की ओर खींच लिया. मैं झुक गया और अपने होंठ उसके टोपे पर रख दिए. जीभ निकालकर टोपे की चमकीली सतह को चाटना शुरू किया. precum का स्वाद मेरे मुंह में भर गया – थोड़ा मीठा, थोड़ा नमकीन. मैं धीरे-धीरे अपने मुंह को लंड के शाफ़्ट पर ले गया, गहराई तक ले गया, फिर बाहर निकलते हुए लंड को अपने थूक से चिकना किया.

“हाँ… ऐसे ही,” वीरम ने ग़ुर्राते हुए कहा, अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए, “तुम्हारे होंठ मेरे लंड को जैसे घेर लेते हैं, जैसे तुम उसकी रानी हो.”

उजमा ने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए कहा: “चूसते रहो, Monu… मेरे स्वामी की बनी हुई चूत से उसके वीर्य को निकालते रहो.”

मैंने अपने लंड को और तेज़ी से हिलाना शुरू किया. वीरम के लंड के शाफ़्ट पर मेरे होंठों का दबाव बढ़ रहा था, और मैं अपने आप को रोक नहीं पाया. मेरा लंड थरथराने लगा, मैं अपने आप को रोक नहीं पाया.

वीरम ने एक गहरा, तेज़ धक्का मारा और फिर से झड़ गया. इस बार वीर्य की बूंदें उजमा की चूत के बाहर निकलकर मेरे चेहरे पर गिर पड़ीं – गर्म, नमकीन, थोड़ा कड़वा. मैं अपने होंठों से उन बूंदों को चाट गया, वीर्य का स्वाद मेरे मुंह में भर गया.

“आह… मैं भी झड़ गया,” मैं फुसफुसाया, अपनी साँसें तेज़ करते हुए, “तुम दोनों की वजह से…”

वीरम ने हँसते हुए कहा: “तो अब से हर दिन यही रूटीन होगा. मैं उजमा की चूत को भर दूँगा, और तुम इसे साफ़ करोगे… और मेरा लंड चूसोगे.”

उजमा ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा: “हाँ… मेरे स्वामी की सेवा करना मेरा धर्म है.”

मैं चुपचाप खड़ा रहा, लंड अभी भी खड़ा हुआ, वीर्य का स्वाद मेरे मुंह में भरा हुआ. मेरा दिल धड़क रहा था – नहीं, गुस्से के नहीं… एक अजीब सी तृप्ति के साथ..

u/Infamous-Public5370 — 15 hours ago
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शिवम का प्यार का जाल - विस्तृत सेक्स सीन

उस शाम जब शिवम ने उज़मा को पहली बार चूमा, हवा में कुछ अलग सा था। शाम के 7 बजे थे। किराना स्टोर बंद करके शिवम सीधे हमारे घर आया था। उज़मा ने दरवाजा खोला। वह हल्का सा लाल सूट पहने हुए थी। उसका गोरा चेहरा हल्की पसीने की वजह से चमक रहा था।

"उज़मा, आज तुम और भी खूबसूरत लग रही हो," शिवम ने धीरे से कहा। उसकी आवाज़ में एक खास तरह की गर्माहट थी। उज़मा शर्मा गई और पीछे हट गई।

शिवम ने अंदर कदम रखा। उसने दरवाजा बंद किया। "मैं तुम्हें कुछ देना चाहता हूँ।" उसने अपनी जेब से एक छोटा सा गहना निकाला। "यह तुम्हारे लिए है।"

उज़मा ने उसे देखा। "शिवम जी, यह क्या है? मैं शादीशुदा हूँ।"

"मुझे पता है," शिवम ने आगे बढ़कर कहा। "लेकिन तुम्हारी आँखों में जो कुछ है, वो मुझे रातों को सोने नहीं देता।" उसने उज़मा का हाथ पकड़ा। उसकी उँगलियाँ गर्म थीं।

उज़मा ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन शिवम ने उसे और पास खींच लिया। "शिवम जी, प्लीज..." उसकी आवाज़ काँप रही थी।

"बस एक बार," शिवम ने फुसफुसाया। "मुझे तुम्हें छूने दो।" उसने उज़मा के गाल पर हाथ फेरा। उसकी उँगलियाँ उसके होंठों तक पहुँचीं।

उज़मा की साँस तेज हो गई। "मेरा पति..."

"वह नहीं है," शिवम ने कहा। "और मैं तुम्हें वो सब दूँगा जो वह कभी नहीं दे सका।" उसने उज़मा को दीवार से सटाया।

उसका मुँह उज़मा के होंठों के करीब था। "मैं तुम्हें चूमना चाहता हूँ," उसने कहा।

उज़मा ने आँखें बंद कर लीं। शिवम ने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे। पहले हल्का सा, फिर जोर से। उज़मा का शरीर काँप रहा था। शिवम ने उसकी कमर पकड़ी और उसे और पास खींच लिया।

उसके हाथ उज़मा के स्तनों तक पहुँचे। उसने उन्हें दबाया। उज़मा ने मुँह से आवाज़ निकाली। "आह..."

"तुम्हारे स्तन कितने नरम हैं," शिवम ने कहा। उसने उज़मा का सूट ऊपर किया। उसके नीचे ब्रा थी। शिवम ने ब्रा के ऊपर से ही स्तनों को दबाया।

"शिवम जी... रुकिए," उज़मा ने कहा लेकिन उसकी आवाज़ में कोई ताकत नहीं थी।

शिवम ने ब्रा के हुक खोले। उज़मा के स्तन बाहर आ गए। वे गोरे और भारी थे। निप्पल सख्त हो चुके थे। शिवम ने उन्हें मुँह में लिया। उसने चूसा।

"आह... शिवम जी..." उज़मा ने उसके बाल पकड़े।

शिवम ने उज़मा को बिस्तर पर लिटाया। उसने उसका सूट पूरी तरह उतारा। उज़मा अब सिर्फ पैंटी में थी। शिवम ने उसकी जांघों को सहलाया।

"तुम्हारी जांघें कितनी मुलायम हैं," उसने कहा। उसने उज़मा की पैंटी उतारी। उसकी चूत दिख गई। बाल कटे हुए थे।

शिवम ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड बाहर आ गया। मोटा और काला। उज़मा ने उसे देखा। "इतना बड़ा..."

"यह तुम्हारे लिए है," शिवम ने कहा। उसने उज़मा की जांघें खोलीं। उसने अपनी उँगली चूत पर रखी।

उसने कहा। "तुम तैयार हो।"

उसने लंड को चूत के पास लाया। पहले सिर्फ सिर को छुआ। उज़मा ने साँस रोकी।

"शिवम जी... धीरे..." उज़मा ने कहा।

शिवम ने लंड को धीरे से अंदर डाला। उज़मा की चूत कसी हुई थी। लंड आधा अंदर गया।

"आह..." उज़मा ने चीख मारी।

शिवम ने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर चला गया। उज़मा की आँखों से आँसू निकल आए।

"तुम्हारी चूत मेरे लंड को निगल रही है," शिवम ने कहा। उसने धीरे से चोदना शुरू किया।

हर धक्के के साथ उज़मा का शरीर हिल रहा था। शिवम ने उसके स्तनों को पकड़ा। उसने उन्हें दबाया।

"शिवम जी... आह..." उज़मा की आवाज़ में दर्द और pleasure दोनों थे।

शिवम ने रफ्तार बढ़ाई। उसका लंड उज़मा की चूत में आता-जाता रहा।

"तुम मेरी हो," शिवम ने कहा। "अब तुम मेरी रंडी हो।"

उसने मोबाइल निकाला। वीडियो रिकॉर्ड करने लगा।

"नहीं..." उज़मा ने कहा लेकिन शिवम ने चोदना जारी रखा।

"अब यह वीडियो मेरे पास है," शिवम ने कहा। "अगर तुमने कुछ किया तो मैं इसे फैला दूँगा।"

उसने उज़मा को उल्टा लिटाया। उसकी गांड ऊपर थी। शिवम ने गांड में लंड डाला।

"आह..." उज़मा ने चीख मारी।

शिवम ने उसे जोर-जोर से चोदा। हर धक्के के साथ उज़मा का शरीर आगे की तरफ सरक रहा था।

"तुम्हारी गांड भी बहुत तंग है," शिवम ने कहा।

उसने उज़मा को फिर सीधा लिटाया। उसने उसके मुँह में लंड डाला।

"चूसो," उसने कहा।

उज़मा ने लंड चूसा। उसकी आँखों में आँसू थे।

शिवम ने फिर चोदना शुरू किया। इस बार और जोर से।

"मैं आने वाला हूँ," उसने कहा।

उसने उज़मा की चूत में झड़ गया। गरम-गरम semen अंदर चला गया।

उज़मा लेटी रही। उसका शरीर काँप रहा था।

शिवम ने वीडियो बंद किया। "अब तुम मेरी हो," उसने कहा।

उसने उज़मा को चूमा। "मैं कल फिर आऊँगा।"

u/Infamous-Public5370 — 3 days ago
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शिवम का प्यार का जाल

मैं अरमान और मेरी बीवी उज़मा एक छोटे मुस्लिम मोहल्ले में रहते थे। उज़मा 26 साल की थी, गोरी चमड़ी, भारी-भारी स्तन और मोटी-मोटी गांड वाली औरत। हमारी शादी को तीन साल हो चुके थे। जिंदगी सामान्य चल रही थी।

फिर हमारे घर के पास एक नया किराना स्टोर खुला। मालिक 34 साल का शादीशुदा हिंदू मर्द शिवम था। काला, तगड़ा, मोटा लंड वाला और हमेशा मुस्कुराता रहता। वह अक्सर माल लेकर हमारे घर आता। पहले सिर्फ सामान देता, फिर बातें करने लगा।

शिवम उज़मा से बहुत प्यारी-प्यारी बातें करता। "उज़मा, तुम्हारी आँखें इतनी सुंदर हैं कि मैं हर रोज देखने आता हूँ।" "तुम्हारी मुस्कान मेरे दिल को छू जाती है।" उज़मा पहले शर्मा के अंदर चली जाती लेकिन शिवम की मीठी बातों से धीरे-धीरे खुलने लगी।

एक शाम शिवम ने उज़मा को चूम लिया। "उज़मा, मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ। तुम मेरे सपनों की रानी हो।" उज़मा ने रोका लेकिन शिवम ने कहा कि वह उसे सच्चा प्यार देगा। अगले हफ्ते शिवम फिर आया। इस बार उसने उज़मा को जोर से चूम लिया और उसके स्तनों को दबाते हुए बोला, "मेरी जान, तुम्हारा शरीर इतना नरम है कि मैं तुम्हें अपनी बाहों में समेटना चाहता हूँ।"

उज़मा ने कहा कि वह शादीशुदा है लेकिन शिवम ने कहा कि प्यार सब कुछ माफ़ कर देता है। उसने उज़मा को कमरे में ले जाकर चोदा। उसने उज़मा की चूत में अपना मोटा लंड घुसाया और उसे जोर-जोर से चोदा। उज़मा चिल्लाती रही लेकिन शिवम ने उसका मुंह बंद करके चोदा। "मेरी रानी, तुम्हारी चूत मेरे लंड के लिए बनी है।" जब वह चोद रहा था तो उसने मोबाइल से पूरी वीडियो बना ली।

उसके बाद शिवम ने मुझे वीडियो दिखाया। मैंने देखा कि मेरी बीवी शिवम के नीचे लेटी हुई थी और वह उसकी चूत में लंड डालकर चोद रहा था। उज़मा की आँखों में आंसू थे लेकिन वह चुपचाप लेटी थी। शिवम ने कहा कि अगर मैंने कुछ किया तो वह यह वीडियो पूरे मोहल्ले में फैला देगा।

शिवम ने उज़मा को उल्टा लिटाया और उसके ऊपर मुझे भी लिटा दिया। फिर उसने हम दोनों की गांड में लंड डाला। हम दोनों एक दूसरे के मुंह में जीभ डालकर चूमते रहे जबकि वह हमें चोदता रहा।

एक दिन शिवम अपने दोस्त राहुल को लेकर आया। राहुल भी 32 साल का तगड़ा हिंदू मर्द था। शिवम ने उज़मा को दोनों के सामने नंगा करके लिटाया। "आज मेरी रानी दोनों लंड चूसेगी।" उज़मा ने दोनों के लंड मुंह में लिए और चूसी। शिवम ने उज़मा की चूत में लंड डाला और राहुल ने उसके मुंह में। दोनों उसे जोर-जोर से चोदते रहे।

शिवम ने मुझे भी चोदना शुरू कर दिया। वह मुझे नंगा करके फर्श पर लिटाता और मेरी गांड में लंड डालता। "अब तू भी हमारी रंडी है।" राहुल ने भी मेरी गांड चोदी। उज़मा को देखने पर मजबूर किया कि कैसे दोनों मुझे चोद रहे हैं।

अब शिवम और राहुल कभी भी आते हैं। कभी सुबह, कभी रात के 2 बजे। वे उज़मा को चोदते हैं, मुझे चोदते हैं, और हम दोनों को एक साथ चोदते हैं। वे हमें गालियां देते हैं – "मुस्लिम रंडी", "गांडू", "लंड की भूखी"।

उज़मा अब खुद ही शिवम के लंड को मुंह में ले लेती है। मैं भी अपनी गांड उनके सामने पेश कर देता हूँ। शिवम की वीडियो ने हम दोनों को उनका गुलाम बना दिया है। अब हम दोनों शिवम और राहुल के आने का इंतजार करते हैं।

u/Infamous-Public5370 — 4 days ago
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हिंदू मर्दों की रंडी

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हम दोनों शुरू से ही एक छोटे से शहर में रहते थे। मैं एक मिडिल-क्लास मुस्लिम आदमी हूँ और मेरी बीवी सना एक खूबसूरत, 28 साल की औरत थी। उसकी फेयर स्किन, बड़ी बड़ी आँखें, मोटी गांड और बड़े बूब्स उसको हर किसी की नजर का निशाना बना देते थे। हम दोनों का रिश्ता बहुत नॉर्मल था – रोज का काम, शाम को टीवी, हफ्ते में एक दो बार सेक्स। कभी भी किसी और मर्द की तरफ देखा नहीं था सना ने।

एक दिन हमारे घर के पास एक नई कंस्ट्रक्शन साइट शुरू हुई। तीन हिंदू मजदूर वहाँ काम करते थे – रमेश, सुरेश और विक्रम। तीनों मोटे, काले और तगड़े थे। उनके हाथ में काम की वजह से मोटी नसें उभर आती थीं और उनके लंड के उभार को उनके गंदे कपड़ों में भी छुपाना मुश्किल था। वह अक्सर हमारे घर के सामने पानी पीने आते थे। पहले तो वह सिर्फ पानी मांगते थे, फिर धीरे धीरे बातें शुरू हो गईं। वह लोग मुझसे भी बात करते, सना से भी। सना शर्मा के अंदर चली जाती, लेकिन उनकी आँखों में एक अलग सी भूख होती थी।

एक शाम जब मैं घर आया तो देखा कि रमेश और सुरेश हमारे घर के अंदर बैठे हैं। सना उनको चाय दे रही थी। उन दोनों की आँखें सना के बूब्स पर अटक रही थीं जो उसके टाइट कुर्ते में उभर रहे थे। मैंने कुछ नहीं कहा, सिर्फ मुस्कुराया और बैठ गया। वह लोग धीरे धीरे रोज आने लगे। कभी काम के बाद, कभी शाम को। एक दिन विक्रम भी साथ आ गया। तीनों एक साथ आते, बातें करते और धीरे धीरे सना के साथ भी खुल के बात करने लगे।

फिर एक रात हुई जो सब बदल गई।

वह तीन आए, जैसे हर बार आते थे। लेकिन इस बार उनके हाथ में कुछ और था। रमेश ने दरवाजा बंद किया और सीधा मेरे पास आया। उसने मुझे एक थप्पड़ मारा जो इतना जोर का था कि मैं जमीन पर गिर पड़ा। सुरेश ने सना को पकड़ लिया और उसके कुर्ते के ऊपर से उसके बूब्स को जोर से दबाया। सना चिल्लाई लेकिन विक्रम ने उसका मुंह बंद कर दिया।

“अब से यह घर हमारा है,” रमेश ने कहा, “और यह दोनों हमारी रंडियां हैं।”

तीनों ने मुझे और सना को जोर जोर से मारा। मुझे नंगा कर दिया और फ्लोर पर बैठने को कहा। सना को भी नंगा कर दिया। उसके बड़े बूब्स हिल रहे थे और उसकी चिकनी चूत साफ दिखाई दे रही थी। रमेश ने पहले सना को पकड़ा और उसके मुंह में अपना मोटा, काला लंड घुसा दिया। सना की आँखों से आंसू निकल आए लेकिन वह रोक नहीं पाई। सुरेश ने मेरी बीवी की गांड को हाथ से चौड़ा किया और अपनी जीभ उसकी गांड के छेद में घुसा दी। विक्रम ने मुझे पकड़ा और मेरा मुंह खोल के अपना लंड अंदर डाल दिया। मैं गैगिंग कर रहा था लेकिन वह जोर जोर से धक्के मार रहा था।

रमेश ने सना को सीधा फ्लोर पर लिटाया और उसकी चूत में अपना पूरा लंड एक ही धक्के में घुसा दिया। सना की चीख निकल गई। उसने रमेश के कंधे को पकड़ा लेकिन वह रुक नहीं रहा था। हर धक्के के साथ उसका लंड सना की चूत को फाड़ रहा था। सुरेश ने मेरी बीवी की गांड में अपना लंड डाल दिया जबकि रमेश अभी भी उसकी चूत में चोद रहा था। दोनों एक साथ उसके दोनों छेदों को चोद रहे थे। मैं जमीन पर बैठा था और देख रहा था कि मेरी बीवी दो मर्दों के लंड से भरी हुई है। विक्रम ने मेरा मुंह चोदना बंद किया और मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया। मैं दर्द से चिल्लाया लेकिन वह जोर से धक्के मार रहा था।

वह रात लंबी थी। तीनों ने हम दोनों को अलग अलग तरीके से चोदा। कभी सना को डॉगी स्टाइल में चोदते, कभी मुझे मुंह में लंड डाल के। कभी दोनों को साथ में लिटा के एक एक लंड हमारी गांड और चूत में डालते। हर बार वह हमें थप्पड़ मारते, बाल पकड़ के खींचते और गंदी गालियां देते। “मुस्लिम रंडी”, “गांडू”, “लंड की भूखी” – यह सब वह लोग चिल्लाते रहते।

पहले कुछ हफ्ते सिर्फ दर्द और डर था। हर बार वह आते और हमें चोदते। कभी सिर्फ सना को, कभी सिर्फ मुझे, कभी दोनों को साथ। एक बार उन्होंने सना को इतना चोदा कि उसकी चूत से खून निकल आया। लेकिन धीरे धीरे कुछ बदलने लगा।

एक रात जब रमेश मेरी बीवी की चूत में अपना लंड डाल रहा था और सुरेश मेरा मुंह चोद रहा था, मैंने देखा कि सना की आँखों में दर्द के साथ कुछ और भी था। वह धीरे धीरे अपनी गांड उठा के रमेश के धक्के ले रही थी। उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल रही थी। जब विक्रम ने मेरी गांड में लंड डाला तो मैंने भी अपनी गांड को थोड़ा सा पीछे किया। वह तीनों हंस पड़े।

उस दिन के बाद से कुछ अलग होने लगा। अब जब वह आते तो हम दोनों खुद नंगे हो जाते। सना उनके लंड को हाथ से पकड़ के मुंह में ले लेती। मैं भी अपनी गांड को उनके लंड के सामने पेश कर देता। वह लोग अब हमें बिना मारे भी चोदते थे। लेकिन अब भी कभी कभी जोर से थप्पड़ और गालियां देते, क्योंकि हमें वह भी पसंद आने लगा था।

अब वह लोग कभी भी आते हैं। कभी सुबह, कभी दोपहर, कभी रात के 2 बजे। कभी सिर्फ सना को चोदते हैं – रमेश उसकी चूत में लंड डालता है, सुरेश उसके मुंह में और विक्रम उसकी गांड में। कभी सिर्फ मुझे चोदते हैं – तीनों एक एक करके मेरी गांड और मुंह को अपने लंड से भर देते हैं। कभी दोनों को साथ में चोदते हैं। एक बार उन्होंने सना को उल्टा लिटाया और उसके ऊपर मुझे भी लिटाया। फिर तीनों ने हम दोनों की गांड में अपने लंड डाल दिए। हम दोनों एक दूसरे के मुंह में अपनी जीभ डाल के चूमते रहते थे जबकि वह लोग हमें चोदते रहते।

अब सना के मुंह से खुद ही निकल आता है – “और जोर से चोदो”, “मेरी चूत फाड़ दो”, “मैं तुम्हारी रंडी हूँ”। मैं भी उनके लंड को अपने मुंह में लेके चूसने लगता हूँ बिना किसी शर्म के। कभी कभी वह लोग हमें एक दूसरे के सामने चोदते हैं और हम दोनों देखते रहते हैं। एक बार रमेश ने सना को इतना चोदा कि उसकी चूत से उसका पानी निकल आया और फिर उसने मुझे उसकी चूत साफ करने को कहा। मैं नीचे झुक के अपनी बीवी की चूत को चाटने लगा जबकि सुरेश मेरी गांड को चोद रहा था।

अब हम दोनों उनके लंड के आदी हो चुके हैं। जब भी घर का दरवाजा खुलता है और वह तीन आते हैं, हम दोनों की चूत और गांड गीली हो जाती है। हम जानते हैं कि आज भी कोई न कोई हमें चोदने वाला है – कभी मेरी बीवी को, कभी मुझे, कभी दोनों को साथ में। और हम दोनों तैयार रहते हैं उनके मोटे, काले लंड के लिए।

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u/Infamous-Public5370 — 5 days ago