
हिंदू बुल, मुस्लिम चूत और ककोल्ड पति
नोएडा की उसी सोसाइटी में जहाँ मैं, मोनू – तीस साल का मुस्लिम ऑफिस क्लर्क – अपनी बीवी उजमा के साथ रहता हूँ, पिछले कुछ हफ्तों से कुछ बदला‑बदला सा महसूस हो रहा था। उजमा पहले की तरह पर्दे में रहती थी, लेकिन अब वह जिम के टाइम्स में टाइट लेगिंग्स और कROP टॉप पहनकर बाहर निकलने लगी। उसके स्तनों की उभरी हुई बनावट और टाइट पैंटी की रेखा अक्सर मेरे gaze को रोक देती। मैं चुपचाप देखता रहा, अपने लंड में एक अजीब सी excitations की लहर महसूस करते हुए।
एक शाम, जब मैं ऑफिस से थक कर घर लौटा, तो बालकनी में उजमा खड़ी थी – उसकी साड़ी का pallu गिरा हुआ, ब्रा के straps दिख रहे थे, और वह एक लड़के के साथ हँस रही थी। वह लड़का लंबा, चौड़ाई में भारी, कंधों पर जिम के वजन से बनी हुई मांसपेशियाँ, और एक तेज़ गंध वाला परफ्यूम लगाए हुए था। उसका नाम वीरम था – एक कट्टर हिंदू, जिम का ट्रेनर, जो अक्सर हमारे फ्लैट के पास की पार्किंग में अपनी बाइक खड़ी करता था।
“भाभी जी, आज का leg day कैसा गया?” वीरम ने मुस्कुराते हुए पूछा, उसकी आँखें उजमा की चूचियों पर टिक गईं।
उजमा ने अपने होंठों को भींचते हुए जवाब दिया: “अच्छा… लेकिन अभी भी थोड़ा तनाव है।”
वीरम ने एक कदम आगे बढ़ाया, उसकी उंगली उजमा की कमर पर फिसली। “मैं वो तनाव दूर कर सकता हूँ… अगर आप अनुमति दें।”
उस रात मैं सो नहीं पाया। दीवार के पास खड़े होकर मैंने सुना – उजमा की सिसकारियाँ, वीरम की गहरी साँसें, और फिर ए आवाज़: “तुम्हारी चूत तो जैसे आग है, भाभी… मैं इसे बुझाना चाहता हूँ।”
अगले दिन वीरम ने हमें अपने फ्लैट पर चाय के लिए बुलाया। मैं अनिच्छा से गया, लेकिन उजमा की आँखों में एक चमक देखी – जैसे वह कुछ नया आजमाने को तैयार हो।
वीरम का फ्लैट साफ़-सुथरा था, लेकिन बीच में एक बड़ा सोफा था जिस पर एक काली चमड़े की पट्टी बंधी हुई थी – जैसे किसी बंधन के लिए। उसने हमें सोफे पर बैठने को कहा और खुद एक protein shake बनाते हुए कहा: “आज मैं तुम्हें दोनों को एक नया अनुभव दूँगा।”
उजमा ने झिझकते हुए कहा: “क्या… क्या हम कुछ ऐसा कर सकते हैं जो… जो हमारे सामान्य रूटीन से बाहर हो?”
वीरम ने हँसते हुए जवाब दिया: “बिल्कुल। बस तुम दोनों को मेरे कहने पर करना होगा।”
उसने पहले उजमा को खड़ा किया और उसकी साड़ी का pallu खींचकर गिरा दिया। उजमा की ब्रा के कप से उसके स्तन बाहर निकल आए – गहरे, गुलाबी निप्पल जो हवा में फड़फड़ा रहे थे। वीरम ने एक हाथ उजमा की कमर पर रखा और दूसरे हाथ से उसकी चूत के ऊपर की पैंटी को धीरे-धीरे नीचे खींच दिया। पैंटी गिरते ही उजमा की चिकनी चूत दिखी – उसकी फड़फड़ाती हुई खुजली के साथ एक चमकदार रस टपक रहा था।
“देखो, Monu,” वीरम ने मेरी ओर मुड़कर कहा, “तुम्हारी बीवी की चूत तो जैसे एक आमंत्रण है। मैं इसे भर दूँगा।”
मैं खड़ा रहा, मेरा लंड पैंट में तना हुआ, दिल की धड़कन तेज़। वीरम ने उजमा को सोफे पर पीठ के बल लिटा दिया और अपने कपड़े उतारने शुरू किए। उसकी टी-शर्ट उतरते ही छाती पर बालों का जंगल दिखा, बीच में एक मोटी नस जो उसके लंड की ओर जा रही थी। जींस खोलते ही अंडरवियर फटने को था – लंड का उभार साफ़ दिख रहा था, टोपा लाल-गुलाबी, नसें उभरी हुईं।
वीरम ने अंडरवियर उतारा। लंड बाहर आया – लगभग नौ इंच लंबा, मोटा जैसे हाथ की कलाई, टोपा पर एक चमकती हुई precum की बूंद। नसें धड़क रही थीं, जैसे वो किसी जानवर की तरह फड़फड़ा रहा हो।
“तुम्हारी चूत तैयार है?” वीरम ने उजमा के होंठों पर अपने टोपा को रखते हुए पूछा।
उजमा ने फुसफुसाते हुए जवाब दिया: “हाँ… लो अंदर… पूरा का पूरा लंड डाल दो।”
वीरम ने एक धीमा धक्का मारा। टोपा उजमा की चूत के होंठों को फाड़ते हुए अंदर फिसल गया। उजमा की पीठ arches हो गई, वो एक लंबी, कामुक चीख के साथ झुक गई: “आह्ह्ह… इतना टाइट है!”
मैं सोफे के किनारे पर खड़ा रहा, मेरा लंड पैंट में दर्द कर रहा था। वीरम ने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाई। हर बार जब लंड बाहर आता, तो उजमा की चूत से एक लंबा, चिपचिपा धागा निकलता – वीर्य जैसा रस। जब अंदर जाता, तो उजमा की चूत फूल जाती, फिर सिकुड़ कर लंड को जकड़ लेती।
“तुम्हारी चूत तो जैसे एक वैक्यूम है,” वीरम ने ग़ुर्राते हुए कहा, धक्कों की रफ़्तार बढ़ाते हुए, “हर धक्के पर वो मेरे लंड को खा जाती है।”
उजमा ने अपनी टाँगें वीरम की कमर में लपेट लीं, अपनी गांड ऊपर उठा कर धक्कों का जवाब दे रही थी। हर धक्के के साथ उसकी चूत से एक गहरी “आह…” निकलती, और वो अपने नाख़ून वीरम की पीठ में गड़ा देती।
फिर वीरम ने उजमा को डॉगी स्टाइल में बदल दिया. उसने उजमा की चूत से लंड बाहर निकाला – चूत से एक लंबा धागा टूटा, वीर्य जैसा रस लंड पर लिपटा हुआ था. फिर उसने लंड को चूत के होंठों पर रखकर एक तेज़ धक्का मारा.
उजमा की चूत फड़फड़ाते हुए खुल गई, लंड पूरा अंदर तक घुस गया. वो एक लंबी, दर्दनाक सिसकारी के साथ झुक गई: “आह्ह्ह… मर गई… इतना गहरा…”
वीरम ने तेज़ धक्के लगाने शुरू किए. हर धक्के के साथ:
- उजमा की चूत से एक गीली “पच… पच… पच…” आवाज़ आती
- उसकी चूत की दीवारें लंड को भींचतीं, फिर ढीली पड़तीं
- लंड पर चमकता वीर्य का रस बढ़ता जा रहा था
- उजमा की गांड हर धक्के पर ऊपर उछलती, जैसे वो लंड को और अंदर लेना चाहती हो
“तुम्हारी चूत… ये तो जैसे एक गर्म भट्ठी है,” वीरम ने कहा, उजमा की चूचियों को दबाते हुए, “हर धक्के पर वो मेरे लंड को निगल लेती है.”
उजमा ने फुसफुसाते हुए जवाब दिया: “हाँ… खा जाओ… पूरा का पूरा लंड निगलो.”
वीरम ने एक गहरा, तेज़ धक्का मारा – और झड़ गया. लंड उजमा की चूत के गहराई में pulsate करने लगा. वीर्य की गर्म बूंदें चूत की दीवारों पर टपकने लगीं, फिर भरने लगीं – जैसे एक गर्म नदी उजमा के अंदर बह रही हो.
उजमा ने अपनी चूत को वीरम के लंड के चारों ओर कस लिया, जैसे वो हर बूंद को सोख लेना चाहती हो. उसकी सिसकारी बदलकर एक गहरी, संतोषजनक moan में बदल गई: “आह… भर गया… पूरा का पूरा भर गया…”
वीरम ने लंड बाहर निकाला. चूत से एक लंबा, मोटा धागा टूटा – वीर्य का गुब्बारा फट गया. चूत से सफ़ेद-पीला वीर्य बहने लगा, उजमा की जांघों पर टपकता हुआ. चूत के होंठ थोड़े फुले हुए थे, अंदर से एक गर्म चमक आ रही थी.
अब आया मोड़ जिसकी मैं उम्मीद भी नहीं कर रहा था. वीरम ने उजमा को उठाकर सोफे की पीठ की ओर घुमाया और कहा: “अब तुम्हारी बारी है, cuckold.”
उसने मेरा हाथ पकड़कर मेरी पैंटी की कमर के पास ले गया और मेरी पैंट के बटन खोल दिए. मेरा लंड बाहर आ गया – तना हुआ, नसें फड़फड़ा रही थीं. वीरम ने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और धीरे-धीरे stroking शुरू किया.
“देखो, कैसे ये मुस्लिम पति अपने लंड को हिला रहा है जबकि उसकी बीवी की चूत से मेरे वीर्य की बूंदें टपक रही हैं,” वीरम ने मुस्कुराते हुए कहा, “ये सच्चा ककोल्ड है.”
उजमा ने मेरे सिर को अपनी चूत की ओर खींचते हुए फुसफुसाया: “चाटो, Monu… मेरे स्वामी की बनी हुई चूत को साफ़ करके दिखाओ कि तुम एक सच्चा पति हो.”
मैं झुक गया और अपनी जीभ उजमा की चूत पर रख दी. वीर्य की गर्म, नमकीन स्वाद मेरे जीभ पर फैल गया. मैं अंदर तक गया, उजमा की चूत की दीवारों को चाटते हुए, वीर्य की मोटी परत को बाहर निकालते हुए. हर बार जब मैं वीर्य चाटता, तो उजमा की चूत से एक छोटा सा “आह…” निकलता, और वो अपनी गांड ऊपर उठा कर मेरे मुंह की ओर दबा देती.
वीरम ने मेरी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा: “और अब तुम भी मेरे लंड को चूसो, cuckold. दिखाओ कि तुम कितना अच्छा ले सकते हो.”
उसने मेरे सिर को अपने लंड की ओर खींच लिया. मैं झुक गया और अपने होंठ उसके टोपे पर रख दिए. जीभ निकालकर टोपे की चमकीली सतह को चाटना शुरू किया. precum का स्वाद मेरे मुंह में भर गया – थोड़ा मीठा, थोड़ा नमकीन. मैं धीरे-धीरे अपने मुंह को लंड के शाफ़्ट पर ले गया, गहराई तक ले गया, फिर बाहर निकलते हुए लंड को अपने थूक से चिकना किया.
“हाँ… ऐसे ही,” वीरम ने ग़ुर्राते हुए कहा, अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए, “तुम्हारे होंठ मेरे लंड को जैसे घेर लेते हैं, जैसे तुम उसकी रानी हो.”
उजमा ने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए कहा: “चूसते रहो, Monu… मेरे स्वामी की बनी हुई चूत से उसके वीर्य को निकालते रहो.”
मैंने अपने लंड को और तेज़ी से हिलाना शुरू किया. वीरम के लंड के शाफ़्ट पर मेरे होंठों का दबाव बढ़ रहा था, और मैं अपने आप को रोक नहीं पाया. मेरा लंड थरथराने लगा, मैं अपने आप को रोक नहीं पाया.
वीरम ने एक गहरा, तेज़ धक्का मारा और फिर से झड़ गया. इस बार वीर्य की बूंदें उजमा की चूत के बाहर निकलकर मेरे चेहरे पर गिर पड़ीं – गर्म, नमकीन, थोड़ा कड़वा. मैं अपने होंठों से उन बूंदों को चाट गया, वीर्य का स्वाद मेरे मुंह में भर गया.
“आह… मैं भी झड़ गया,” मैं फुसफुसाया, अपनी साँसें तेज़ करते हुए, “तुम दोनों की वजह से…”
वीरम ने हँसते हुए कहा: “तो अब से हर दिन यही रूटीन होगा. मैं उजमा की चूत को भर दूँगा, और तुम इसे साफ़ करोगे… और मेरा लंड चूसोगे.”
उजमा ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा: “हाँ… मेरे स्वामी की सेवा करना मेरा धर्म है.”
मैं चुपचाप खड़ा रहा, लंड अभी भी खड़ा हुआ, वीर्य का स्वाद मेरे मुंह में भरा हुआ. मेरा दिल धड़क रहा था – नहीं, गुस्से के नहीं… एक अजीब सी तृप्ति के साथ..