u/Typical-Variation-27

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ज़ुल्फ़ की घनी-घनी घटाएँ, शान से ढलकी हुई हैं … लहराता आँचल, है जैसे बादल, बाँहों में भरी है जैसे चाँदनी, रूप की चाँदनी

u/TwoZealousideal89 — 10 days ago

उड़ने लगा क्यूँ मन बावला रे? आया कहाँ से ये हौसला रे? ओ, रे पिया …

u/Typical-Variation-27 — 11 days ago