How are you feeling right now. Describe in short.
u/feral_me_17
बालकनी
घने बादल
झमझमती बारिश
ठंडी हवाएं
धक्के देता उसका
गर्म लौड़ा
बस में गर्मी और भीड़ थी। मैं खिड़की की सीट पर बैठी थी, लेकिन पीछे से एक लंबा सा लड़का मेरे पीछे खड़ा हो गया। उसकी बॉडी मेरी पीठ से सट रही थी। बस हर मोड़ पर झटके से हिल रही थी और उसकी हार्ड लंड मेरी गांड पर रगड़ खा रहा था। मैंने आँखें बंद कर लीं। मन में गंदी गंदी बातें घूमने लगीं।
काश ये लड़का मेरी साड़ी ऊपर कर दे और अपनी मोटी लंड मेरी चूत में ठेल दे। बस में सबके सामने। मेरी चूत तो पहले से ही भीग चुकी थी। पैंटी में नमी महसूस हो रही थी। मैंने अपनी जांघें कसकर दबाईं। उसकी सांस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी। कल्पना करने लगी कि अगर ये मेरे कान में फुसफुसाए, “मैडम, आपकी गांड बहुत नरम है,” तो मैं क्या करूंगी?
मैंने सोचा, बस रुक जाए तो ये मुझे पीछे की खाली सीट पर बिठाकर मेरी ब्लाउज के बटन खोल दे। मेरे निप्पल चूसता रहे और उँगलियाँ मेरी चूत में घुसाए। मैं चुपके से उसकी लंड पर हाथ फेरना चाहती थी। इतनी हार्ड थी कि मेरी हथेली में पूरी तरह समा भी नहीं रही थी। मन में बस यही चल रहा था – वो मुझे झुकाकर खड़ा करे, साड़ी कमर तक चढ़ाए और पीछे से जोर-जोर से ठोके। मेरी चीखें बस की आवाज में छिप जाएँ।
भीड़ बढ़ी तो वो और पास आ गया। अब उसकी लंड मेरी गांड की दरार में दब रही थी। मैंने हल्का सा पीछे धक्का दिया। बस हिली और उसकी लंड और जोर से रगड़ी। मेरी सांसें तेज हो गईं। चूत में खुजली हो रही थी। घर पहुँचकर आज जरूर उँगलियाँ डालूंगी और इसी लड़के को याद करके झड़ूंगी।
बस स्टॉप आया। वो उतर गया। लेकिन मेरी चूत अभी भी पल्स कर रही थी। गंदे खयालों से भरी हुई मैं घर तक गई।
#copied
चोदते-चोदते सुबह हो गई,
लंड पर पड़ गए छाले,
चूत फट के गुफा हो गई,
वाह रे चोदने वाले!
रात के 2 बजे थे। कमरा अंधेरा, सिर्फ मोबाइल की हल्की रोशनी। मैं बिस्तर पर लेटी थी, नींद नहीं आ रही थी। शरीर में आग लग रही थी। पैंटी पहले ही गीली हो चुकी थी।
मैंने तकिए को मोड़ा, उसके बीच में अपना एक पैर रखा और धीरे से उस पर बैठ गई। तकिया मोटा और नरम था। मैंने आँखें बंद कीं और कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए।
"आह्ह..."
धीरे-धीरे रगड़ लगाने लगी। पिल्लो पर अपनी गीली चूत को जोर से दबाती, ऊपर-नीचे, आगे-पीछे। सांसें तेज हो गईं। मैंने ब्रा उतार दी, एक हाथ से अपनी गांड दबाते हुए और दूसरे से छाती मसलते हुए राइडिंग तेज कर दी।
तकिए का कपड़ा मेरी सूजी हुई क्लिट पर रगड़ खा रहा था। मैं कल्पना कर रही थी कि कोई मोटा लंड मेरे अंदर घुस रहा है। गति बढ़ाई। चूत से रस टपक रहा था, तकिया भीग गया।
"फक... हां... और जोर से..." मैं फुसफुसाई।
शरीर काँपने लगा। मैंने तकिए को दोनों हाथों से पकड़कर तेजी से रगड़ना शुरू किया। कूल्हे उछल रहे थे। आखिरकार एक जोरदार झटके के साथ ऑर्गेज्म आ गया। पूरी चूत सिकुड़ गई, रस तकिए पर फैल गया।
मैं हाँफते हुए तकिए पर ही गिर पड़ी। शरीर अभी भी हल्का काँप रहा था।
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